Hsslive.co.in: Kerala Higher Secondary News, Plus Two Notes, Plus One Notes, Plus two study material, Higher Secondary Question Paper.

Thursday, June 23, 2022

BSEB Class 10 Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions PDF: Download Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Book Answers

BSEB Class 10 Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions PDF: Download Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Book Answers
BSEB Class 10 Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions PDF: Download Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Book Answers


BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions and answers for students are now available in pdf format. Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Book answers and solutions are one of the most important study materials for any student. The Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) books are published by the Bihar Board Publishers. These Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) textbooks are prepared by a group of expert faculty members. Students can download these BSEB STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) book solutions pdf online from this page.

Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions PDF

Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Books Solutions with Answers are prepared and published by the Bihar Board Publishers. It is an autonomous organization to advise and assist qualitative improvements in school education. If you are in search of BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Books Answers Solutions, then you are in the right place. Here is a complete hub of Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) solutions that are available here for free PDF downloads to help students for their adequate preparation. You can find all the subjects of Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks. These Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions English PDF will be helpful for effective education, and a maximum number of questions in exams are chosen from Bihar Board.

Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Books Solutions

Board BSEB
Materials Textbook Solutions/Guide
Format DOC/PDF
Class 10th
Subject Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals)
Chapters All
Provider Hsslive


How to download Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions Answers PDF Online?

  1. Visit our website - Hsslive
  2. Click on the Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Answers.
  3. Look for your Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks PDF.
  4. Now download or read the Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions for PDF Free.


BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions with Answer PDF Download

Find below the list of all BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions for PDF’s for you to download and prepare for the upcoming exams:

Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु InText Questions and Answers

अनुच्छेद 3.1 पर आधारित

प्रश्न 1.
ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो –

  1. कमरे के ताप पर द्रव होती है।
  2. चाकू से आसानी से काटी जा सकती है।
  3. ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।
  4. ऊष्मा की कुचालक होती है।

उत्तर:

  1. पारा (मरकरी)
  2. सोडियम
  3. चाँदी (सिल्वर)
  4. सीसा (लेड)

प्रश्न 2.
आघातवर्ध्यता तथा तन्यता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
आघातवर्ध्यता धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने के गुणधर्म को आघातवर्ध्यता कहते तन्यता धातुओं के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं।

अनुच्छेद 3.2 पर आधारित

प्रश्न 1.
सोडियम को केरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
सोडियम बहुत अभिक्रियाशील धातु है। यह कमरे के सामान्य ताप पर भी वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके जलने लगता है। इसलिए इसे केरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।

प्रश्न 2.
इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए –
1. भाप के साथ आयरन।
2. जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम।
उत्तर:
1. 3Fe(s) + 4H4O(g) → Fe3O4(s) + 4H2 (g)
2. (a) Ca(s) + 2H2O(D) → Ca(OH)2(aq) + H2 (g)
(b) 2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2 (g) + ऊष्मा

प्रश्न 3.
A, B, C एवं D चार धातुओं के नमूनों को लेकर एक-एक करके निम्न विलयन में डाला गया। इससे प्राप्त परिणाम को निम्न प्रकार से सारणीबद्ध किया गया है –

इस सारणी का उपयोग कर धातु A, B, C एवं D के संबंध में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है?
  2. धातु B को कॉपर (II) सल्फेट के विलयन में डाला जाए तो क्या होगा?
  3. धातु A, B, C एवं D को अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर:
1. धातु ‘A’ Cu को विस्थापित कर सकती है, धातु ‘B’ Fe को विस्थापित कर सकती है तथा धातु ‘C’ Ag को विस्थापित कर सकती है। Cu, Fe तथा Ag को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में निम्नवत् व्यक्त किया जा सकता है –
Fe > Cu > Ag
अतः धातु ‘B’ सर्वाधिक अभिक्रियाशील है।

2. चूँकि धातु ‘B’ कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है, अत: यह कॉपर (II) सल्फ़ेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देगी। अतः कॉपर सल्फेट का गहरा नीला रंग हल्का हो जायेगा।

3. धातु ‘B’ Fe को विस्थापित कर सकती है, धातु ‘A’ Cu को विस्थापित कर सकती है, धातु धातु B Fe ‘C’ Ag को विस्थापित कर सकती है तथा धातु ‘D’ किसी को भी विस्थापित नहीं कर सकती है; अतः इन्की अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम निम्नवत् होगा
B> A>C>D

प्रश्न 4.
जब अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो कौन-सी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
जब अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो हाइड्रोजन गैस निकलती है। आयरन के साथ तनु H2SO4 की रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण निम्नवत् है –
Fe (s) + dil. H2SO4 → FeSO4(aq) + H2 (g)

प्रश्न 5.
जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से जिंक, आयरन को आयरन (II) सल्फेट विलयन में से विस्थापित कर देता है तथा आयरन (II) सल्फेट विलयन का गहरा हरा रंग हल्का हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिंक आयरन से अधिक अभिक्रियाशील है।
Zn(s) + FeSO4(aq) → ZnSO4 (aq) + Fe(s)

अनुच्छेद 3.3 पर आधारित

प्रश्न 1.

  1. सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम के लिए इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना लिखिए।
  2. इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के द्वारा Na,o एवं Mgo का निर्माण दर्शाइए।
  3. इन यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं?

उत्तर:
1. (a) सोडियम (Na) = 11
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 1

(b) ऑक्सीजन (O) =8
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 6

(c) मैग्नीशियम (Mg) = 12
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 2, 8, 2

2. (a) Na2O का निर्माण

(b) Mgo का निर्माण

3. Nano में Na+और O आयन उपस्थित हैं तथा Mgo में Mg+ और O आयन उपस्थित हैं।

प्रश्न 2.
आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर:
आयनिक यौगिकों के गलनांक बहुत उच्च होते हैं; क्योंकि इनके मध्य उपस्थित अन्तराअणुक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं।

अनुच्छेद 3.4 पर आधारित

प्रश्न 1.
निम्न पदों की परिभाषा दीजिए –

  1. खनिज
  2. अयस्क
  3. गैंग

उत्तर:

  1. खनिज पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले तत्त्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं।
  2. अयस्क कुछ स्थानों पर खनिजों में कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है जिसे निकालना लाभकारी होता है। इन खनिजों को अयस्क कहते हैं।
  3. गैंग पृथ्वी से खनित अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं, जिन्हें गैंग कहते हैं।

प्रश्न 2.
दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।
उत्तर:
सोना और चाँदी धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए अपचयन प्रक्रम का उपयोग किया जाता है।

अनुच्छेद 3.5 पर आधारित

प्रश्न 1.
जिंक, मैग्नीशियम एवं कॉपर के धात्विक ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गर्म किया गया जिंक मैग्नीशियम कॉपर जिंक ऑक्साइड मैग्नीशियम ऑक्साइड धातुकॉपर ऑक्साइड किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?
उत्तर:
विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी जब –

  1. जिंक ऑक्साइड मैग्नीशियम से अभिक्रिया करेगा। चूँकि मैग्नीशियम जिंक से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह जिंक को जिंक ऑक्साइड से विस्थापित करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनायेगा।
  2. कॉपर ऑक्साइड जिंक से अभिक्रिया करेगा। चूँकि जिंक कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह कॉपर को कॉपर ऑक्साइड से विस्थापित करके जिंक ऑक्साइड बनायेगा।
  3. कॉपर ऑक्साइड मैग्नीशियम से अभिक्रिया करेगा। चूँकि मैग्नीशियम कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील है इसलिए यह कॉपर को कॉपर ऑक्साइड से विस्थापित करके मैग्नीशियम ऑक्साइड बनायेगा।

प्रश्न 2.
कौन-सी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?
उत्तर:
वे धातुएँ जो सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित हैं; जैसे – सोना, चाँदी आदि, आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं।

प्रश्न 3.
मिश्रा क्या होते हैं? (2018)
उत्तर:
दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्रातु कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
पीतल, ताँबा एवं जस्ते की मिश्रातु है।

Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में कौन-सा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है?
(a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु
(b) MgCl2 विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु
(c) FeSO4 विलयन एवं सिल्वर धातु
(d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु
उत्तर:
(d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु

प्रश्न 2.
लोहे के फ्राइंग पैन को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त
(a) ग्रीस लगाकर
(b) पेंट लगाकर
(c) जिंक की परत चढ़ाकर
(d) ये सभी
उत्तर:
(c) जिंक की परत चढ़ाकर

प्रश्न 3.
कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है। यह तत्त्व क्या हो सकता है?
(a) कैल्सियम
(b) कार्बन
(c) सिलिकॉन
(d) लोहा
उत्तर:
(a) कैल्सियम

प्रश्न 4.
खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता है क्योंकि
(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है
(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है
(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है
उत्तर:
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है

प्रश्न 5.
आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है
(a) इनका उपयोग कर धातुओं एवं अधातुओं के नमूनों के बीच आप विभेद कैसे कर सकते हैं?
(b) धातुओं एवं अधातुओं में विभेदन के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिताओं का आकलन कीजिए।
उत्तर:
(a) हथौड़ा धातुओं को एक पतली चादर में परिवर्तित कर सकता है जबकि अधातुओं के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। इस प्रकार यह धातुओं तथा अधातुओं के बीच विभेद करने में हमारी सहायता कर सकता है।

बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच की सहायता से हम एक परिपथ तैयार कर सकते हैं। अब परिपथ के मध्य में धातुओं तथा अधातुओं के नमूनों को बारी-बारी से लगाकर हम धातुओं तथा अधातुओं के बीच विभेद कर सकते हैं। यदि नमूना धातु होगा तो परिपथ में स्थित बल्ब जलने लगेगा और यदि नमूना अधातु है (ग्रेफाइट को छोड़कर) तो बल्ब नहीं जलेगा।

(b) उपर्युक्त परीक्षण धातुओं तथा अधातुओं के लक्षणों को बताते हैं इसलिए ये उपयोगी हैं।

प्रश्न 6.
उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय के साथ-साथ क्षारीय लक्षण भी प्रदर्शित करते हैं अर्थात् अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उदासीन ऑक्साइड कहलाते हैं। उदाहरणार्थः ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO)।

प्रश्न 7.
दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगी तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।
उत्तर:
जिंक तथा लोहा हाइड्रोजन को तनु अम्ल में से विस्थापित कर सकते हैं जबकि कॉपर तथा सिल्वर ऐसा नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 8.
किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?
उत्तर:
किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में हम अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की एक पतली छड़ को कैथोड बनाएँगे। धातु लवण के विलयन को हम विद्युत अपघट्य बनाएँगे।

प्रश्न 9.
प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर उसे गर्म किया। चित्र के अनुसार एक परखनली को उलटा करके उसने उत्सर्जित गैस को एकत्र किया – परखनली
(a) गैस की क्रिया क्या होगी

  • सूखे लिटमस पत्र पर?
  • आर्द्र लिटमस पत्र पर?

(b) ऊपर की अभिक्रियाओं के लिए बर्नर संतुलित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर:
(a) जब सल्फर को वायु में जलाया जाता है तो यह वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है।

  • सूखे लिटमस पत्र पर गैस की क्रिया सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस की प्रकृति अम्लीय होती है परन्तु यह सूखे लिटमस पत्र से अभिक्रिया नहीं करेगी और न ही उसका रंग परिवर्तित करेगी क्योंकि अम्लीय लक्षण केवल जल की उपस्थिति में परिलक्षित होता है। आर्द्र लिटमस पत्र पर गैस की क्रिया सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) गैस की प्रकृति अम्लीय होती है।
  • आर्द्र लिटमस पत्र से क्रिया करके यह सल्फ्यूरस अम्ल बनाएगी जिससे नीला लिटमस पत्र लाल हो जाता है।

प्रश्न 10.
लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइए।
उत्तर:
लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके निम्नवत् हैं –

  1. लोहे की सतह पर पेंट या ग्रीज़ लगाकर।
  2. यशदलेपन (लोहे की वस्तुओं पर जस्ते की परत चढ़ाकर) करके।

प्रश्न 11.
ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?
उत्तर:
ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं; परन्तु क्षारकीय ऑक्साइड कभी नहीं बनाती हैं।

प्रश्न 12.
कारण बताइए –
(a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अंदर संगृहीत किया जाता है।
(c) ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।
(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।
उत्तर:
(a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी सबसे कम अभिक्रियाशील धातुएँ हैं इसलिए ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाती हैं। ये अपनी चमक बहुत लम्बे समय तक बनाए रखती हैं। यही कारण है कि इनका प्रयोग आभूषण बनाने में किया जाता है।

(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम बहुत अभिक्रियाशील हैं। ये कमरे के सामान्य ताप पर भी वायु की ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अपने ऑक्साइड बनाते हैं। यह अभिक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि आग भी लग सकती है। इसलिए किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए इन्हें केरोसिन में संगृहित किया जाता है।

(c) ऐलुमिनियम ऊष्मा का बहुत अच्छा सुचालक है तथा यह प्रकृति में सर्वाधिक मात्रा में पायी जाने वाली धातु है। यह ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके अपनी सतह पर ऑक्साइड की एक परत बना लेता है जो इसे और अधिक संक्षारित होने से बचाती है। यही कारण है कि अभिक्रियाशील होते हुए भी ऐलुमिनियम का प्रयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने में किया जाता है।

(d) कार्बोनेट अथवा सल्फाइड अयस्कों से धातु प्राप्त करना बहुत कठिन है जबकि धातु ऑक्साइडों से धातु प्राप्त करना बहुत सरल है। यही कारण है कि कार्बोनेट अथवा सल्फाइड अयस्कों को पहले धातु ऑक्साइडों में परिवर्तित किया जाता है।

प्रश्न 13.
आपने ताँबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ करने में क्यों प्रभावी हैं?
उत्तर:
ताँबे के मलीन बर्तनों पर धातु कार्बोनेट की एक परत जमी होती है जिसकी प्रकृति क्षारकीय होती है। नींबू या इमली के रस की प्रकृति अम्लीय होती है। जब हम इस रस से मलीन बर्तन को साफ़ करते हैं तो यह धातु कार्बोनेट की परत को उदासीन कर देता है यही कारण है कि हम ताँबे के मलीन बर्तनों को नींबू या इमली के रस से साफ करते हैं।

प्रश्न 14.
रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं और अधातुओं में विभेद

प्रश्न 15.
एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है। उसने पुराने एवं मलीन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढोंग रचाया। कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है।

कंगन नए की तरह चमकने लगते हैं लेकिन उनका वजन अत्यंत कम हो जाता है। वह महिला बहुत दुखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है। एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते हैं?
उत्तर:
उस व्यक्ति ने जिस विलयन का उपयोग किया उसका नाम ऐक्वा रेजिया है। ऐक्वा रेजिया सांद्र नाइट्रिक अम्ल तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का 1:3 अनुपात में बना मिश्रण है। सोना केवल ऐक्वा रेजिया में ही घुलनशील है।

प्रश्न 16.
गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परंतु इस्पात (लोहे की मिश्रातु) का नहीं। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परन्तु इस्पात (लोहे की मिश्रातु) का नहीं, क्योंकि ताँबा गर्म जल अथवा भाप से अभिक्रिया नहीं करता है जबकि इस्पात गर्म जल अथवा भाप से अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड बनाता है।

Bihar Board Class 10 Science धातु एवं अधातु Additional Important Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हाइड्रोजन है –
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(b) अधातु

प्रश्न 2.
ऐन्टिमनी है – (2014, 16)
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(c) उपधातु

प्रश्न 3.
आघातवर्धनीयता प्रदर्शित करता है – (2018)
(a) सल्फर
(b) आयोडीन
(c) फॉस्फोरस
(d) ताँबा
उत्तर:
(d) ताँबा

प्रश्न 4.
धातु जो सरलता से ऑक्सीकृत हो जाती है, वह है (2011)
(a) Cu
(b) Ag
(c) Al
(d) Pt
उत्तर:
(c) Al

प्रश्न 5.
धातुओं के ऑक्साइड होते हैं –
(a) अम्लीय
(b) क्षारीय
(c) उभयधर्मी
(d) उदासीन
उत्तर:
(b) क्षारीय

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु जल के साथ सामान्य ताप पर ही अभिक्रिया कर लेती है अर्थात् हाइड्रोजन गैस निकालती है? (2011, 12, 13)
या कौन-सी धातु ठंडे जल के साथ अभिक्रिया कर लेती है? (2018)
(a) कॉपर
(b) आयरन
(c) मैग्नीशियम
(d) सोडियम/कैल्सियम
उत्तर:
(d) सोडियम/कैल्सियम

प्रश्न 7.
निम्न में से कौन-सी धातु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती है? (2014, 15)
(a) Fe
(b) Zn
(c) Cu
(d) Mg
उत्तर:
(c) Cu

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु अम्ल में से हाइड्रोजन विस्थापित करती है? (2011, 13, 17)
(a) Mg
(b) Pt
(c) Cu
(d) Hg
उत्तर:
(a) Mg

प्रश्न 9.
जस्ता धातु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रिया करके कौन-सी गैस निष्कासित करती है? (2016)
(a) ओजोन
(b) ऑक्सीजन
(c) हाइड्रोजन
(d) नाइट्रोजन
उत्तर:
(c) हाइड्रोजन

प्रश्न 10.
तत्त्व A, B, C, D के मानक अपचयन विभव क्रमशः +0.60, -0.35, -1.50, – 2.71 वोल्ट हैं। सबसे अधिक क्रियाशील तत्त्व होगा- (2017)
(a) A
(b) B
(c) C
(d) D
उत्तर:
(d) D

प्रश्न 11.
ताँबे का अयस्क है – (2011)
(a) बॉक्साइट
(b) मैलेकाइट
(c) कार्नेलाइट
(d) सीडेराइट
उत्तर:
(b) मैलेकाइट

प्रश्न 12.
कॉपर पायराइट का सूत्र है –
(a) CuFeS2
(b) Cu2S
(c) CuCO3 Cu(OH)3
(d) Cu2O
उत्तर:
(a) CuFeS2

प्रश्न 13.
फफोलेदार कॉपर है – (2009, 14, 16)
(a) शुद्ध कॉपर
(b) कॉपर का अयस्क
(c) कॉपर की मिश्र-धातु
(d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं
उत्तर:
(d) कॉपर जिसमें 2% अशुद्धियाँ होती हैं

प्रश्न 14.
मैट में मुख्यतः होता है – (2015, 17)
(a) FeS
(b) Cu2S
(c) Cu2S तथा FeS
(d) Cu2S तथा Fe2S3
उत्तर:
(c) Cu2S तथा FeS

प्रश्न 15.
चैल्कोसाइट अयस्क है – (2011)
(a) आयोडीन का
(b) आयरन का
(c) सोडियम का
(d) कॉपर का
उत्तर:
(d) कॉपर का

प्रश्न 16.
क्लोराइड अयस्क का उदाहरण है – (2013)
(a) बॉक्साइट
(b) मैलेकाइट
(c) सीडेराइट
(d) हॉर्न सिल्वर
उत्तर:
(d) हॉर्न सिल्वर

प्रश्न 17.
ताम्र ग्लान्स का रासायनिक सूत्र है। (2016)
(a) Cu2S
(b) Cu2O
(c) CuFeS2
(d) CuCO3
उत्तर:
(a) Cu2S

प्रश्न 18.
कॉपर पायराइट को वायु में गर्म करके सल्फर को दूर करने की क्रिया को कहते हैं – (2012)
(a) निस्तापन
(b) भर्जन
(c) प्रगलन
(d) बेसेमरीकरण
उत्तर:
(b) भर्जन

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में से कौन-सा अयस्क ऐलमिनियम का नहीं है?
(a) बॉक्साइट
(b) डायस्पोर
(c) कोरण्डम
(d) ऐजुराइट
उत्तर:
(d) ऐजुराइट

प्रश्न 20.
क्रायोलाइट अयस्क है –
(a) Fe का
(b) Al का
(c) Cu का
(d) Ag का
उत्तर:
(b) Al का

प्रश्न 21.
ऐलुमिनियम में विद्युत-अपघटन में क्रायोलाइट मिलाया जाता है –
(a) ऐलुमिना का गलनांक घटाने के लिए
(b) विद्युत-चालकता बढ़ाने के लिए
(c) ऐलुमिना की अशुद्धियाँ पृथक् करने के लिए
(d) ऐनोड प्रभाव कम करने के लिए
उत्तर:
(a) ऐलुमिना का गलनांक घटाने के लिए

प्रश्न 22.
परावर्तनी भट्ठी का उपयोग होता है – (2018)
(a) प्रगलन में
(b) निस्तापन में
(c) बेसेमरीकरण में
(d) अतिशीतलन में
उत्तर:
(b) निस्तापन में

प्रश्न 23.
मुद्रा मिश्रधातु है – (2016)
(a) Cu (95%), Sn (4%), P (1%)
(b) Cu (80%), Zn (20%)
(c) Cu (88%), Sn (12%)
(d) Cu (90%), Zn (2%), Sn (8%)
उत्तर:
(a) Cu (95), Sn (4%), P (1%)

प्रश्न 24. पीतल है – (2017)
(a) धातु
(b) अधातु
(c) उपधातु
(d) मिश्रधातु
उत्तर:
(d) मिश्रधातु

प्रश्न 25.
पीतल में होते हैं –
(a) Cu a sn
(b) Cu a Ni
(c) Cu a zn
(d) Mg a Al
उत्तर:
(c) Cu व Zn

प्रश्न 26.
जर्मन सिल्वर में कौन-सी धातु नहीं होती है? (2014)
(a) Cu
(b) Zn
(c) Ag
(d) Ni
उत्तर:
(c) Ag

प्रश्न 27.
काँसे की प्रतिमाएँ बनी होती हैं – (2012)
(a) कॉपर-जिंक की
(b) कॉपर-टिन की
(c) कॉपर-निकिल की
(d) कॉपर-आयरन की
उत्तर:
(b) कॉपर-टिन की

प्रश्न 28.
अमलगम होते हैं – (2013)
(a) उपधातु
(b) मिश्र धातु
(c) यौगिक
(d) विषमांगी मिश्रण
उत्तर:
(d) विषमांगी मिश्रण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उप-धातु किसे कहते हैं। किन्हीं दो उपधातुओं के नाम लिखिए। या जिन तत्त्वों में धातु तथा अधातु दोनों के गुण पाये जाते हैं, उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर:
वे तत्त्व जिनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाये जाते हैं, उपधातु कहलाते हैं; जैसेआर्सेनिक, एन्टीमनी।

प्रश्न 2.
चार धातुएँ सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती हैं। इनमें से किसी एक का नाम लिखिए।
उत्तर:
मरकरी (पारा)।

प्रश्न 3.
किन्हीं दो अधातुओं के नाम लिखिए जिनमें चमक पायी जाती है।
उत्तर:
आयोडीन, ग्रेफाइट।

प्रश्न 4.
लोहे पर निम्न में से किस धातु की परत चढ़ाई जा सकती है और क्यों? (2012) Mg, Cu, Ag
उत्तर:
लोहे पर Cu व Ag की परत चढ़ाई जा सकती है क्योंकि लोहा रासायनिक सक्रियता श्रेणी में इनसे ऊपर है। अत: यह इनके विलयनों से इन्हें विस्थापित कर देता है।

प्रश्न 5.
कॉपर के दो प्रमुख अयस्कों के नाम व सूत्र लिखिए। (2009, 11, 13, 15, 17, 18) या कॉपर के दो सल्फाइड अयस्कों के नाम एवं सूत्र लिखिए। (2014, 16)
उत्तर:
1. सल्फाइड अयस्क कॉपर ग्लान्स (Cu2S) व कॉपर पायराइट (Cures.)
2. ऑक्साइड अयस्क क्यूप्राइट (Cu2O)

प्रश्न 6.
कॉपर पाइराइट का सान्द्रण किस विधि द्वारा किया जाता है? (2017)
उत्तर:
फेन प्लवन विधि द्वारा।

प्रश्न 7.
नम वायु के साथ कॉपर की क्या अभिक्रिया होती है? रासायनिक समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
वायुमण्डलीय कार्बन डाइ-ऑक्साइड, नमी व ऑक्सीजन से क्रिया करके यह हरे रंग का भास्मिक कॉपर कार्बोनेट [CuCO3.Cu(OH)2] बनाता है।

प्रश्न 8.
कॉपर मैट क्या है? (2018)
उत्तर:
कॉपर धातु के निष्कर्षण प्रक्रम में क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड का गलित मिश्रण प्राप्त होता है, जिसे मैट कहते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न को पूर्ण कीजिए –
2AgNO3 + Cu → ………. + ………..
उत्तर:
2AgNO3 + Cu → Cu(NO3)2 + 2Ag

प्रश्न 10.
बॉक्साइट तथा मैलेकाइट का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
बॉक्साइट Al2O3. 2H2O
मैलेकाइट CuCO3.Cu(OH)2

प्रश्न 11.
ऐलुमिनियम के दो अयस्कों के नाम व सूत्र दीजिए।
उत्तर:
1. बॉक्साइट Al2O2.2H2O
2. क्रायोलाइट Na3 AIF6

प्रश्न 12.
गन मेटल की संरचना तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर:
गन मेटल में Cu – 88%, Sn – 10% तथा Zn – 2% होता है। इसका उपयोग बन्दूक, हथियार व मशीनों के पुर्जे बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 13.
फॉस्फर ब्रांज के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
रेडियो के एरियल तथा पुर्जे बनाने में।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धातु तथा अधातु तत्त्वों के किन्हीं चार सामान्य गुणों का उल्लेख कीजिए। (2012)
उत्तर:
धातुओं के भौतिक गुण –

  1. शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है। धातु के इस गुण-धर्म को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं।
  2. धातुएँ सामान्यत: कठोर होती हैं। प्रत्येक धातु की कठोरता अलग-अलग होती है।
  3. कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है। इस गुण-धर्म को आघातवर्धनीयता = कहते हैं। सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य हैं।
  4. धातु के पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है। एक ग्राम सोने से 2 किमी लम्बा तार खींचा जा सकता है।

अधातुओं के भौतिक गुण –

  1. अधिकांश अधातुएँ साधारण ताप पर गैस अवस्था में होती हैं। ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो साधारण ताप पर द्रव होती है।
  2. ठोस अधातुएँ आघातवर्ध्य व तन्य नहीं होती हैं ये भंगुर होती हैं। उदाहरणार्थ-सल्फर और फॉस्फोरस को हथौड़े से पीटने पर ये टूट जाती हैं।
  3. अधातुओं में चमक नहीं पायी जाती है।
  4. अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। ग्रेफाइट एक अपवाद है जोकि विद्युत का सुचालक है।

प्रश्न 2.
रासायनिक दृष्टिकोण से धातु तथा अधातु में मुख्य अन्तर क्या हैं? हाइड्रोजन में धनायन बनाने की प्रवृत्ति होती है तथापि यह अधातु है। क्यों स्पष्ट कीजिए। (2014)
उत्तर:
सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में धातु अपने परमाणुओं से एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों का त्याग करती है जबकि अधातु एक या अधिक इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं। हाइड्रोजन में धनायन बनाने की प्रवृत्ति होने के साथ-साथ ऋणायन बनाने की प्रवृत्ति भी होती है। इसके अतिरिक्त इसमें धातुओं के अन्य सामान्य गुण भी नहीं पाये जाते हैं। यही कारण है कि यह धातु नहीं है बल्कि अधातु है।

प्रश्न 3.
विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं द्वारा अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता किस प्रकार ज्ञात करते हैं। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (2013)
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी में जो धातुएँ हाइड्रोजन से ऊपर हैं वे अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करती हैं तथा श्रेणी में धातु का स्थान जितना ऊपर होता है उसकी अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करने की क्षमता भी उतनी अधिक होती है। उदाहरणार्थ : विद्युत रासायनिक श्रेणी में सोडियम व कैल्सियम हाइड्रोजन से ऊपर हैं अत: ये दोनों ही अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करते हैं। परन्तु सोडियम अधिक शीघ्रता से हाइड्रोजन विस्थापित करती है।

प्रश्न 4.
विद्यत रासायनिक श्रेणी के आधार पर व्याख्या कीजिए कि क्यों कॉपर तन सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है? (2017, 18)
उत्तर:
हम जानते हैं कि जो धातु सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं, वे ही अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाती हैं। वैद्युत रासायनिक श्रेणी में कॉपर हाइड्रोजन से नीचे स्थित है। अत: कॉपर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है।

प्रश्न 5.
कॉपर की छड़ को AgNO3 विलयन में डालने पर कुछ समय बाद विलयन का रंग नीला हो जाता है। विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर समझाइए। (2012, 17) क्या होता है जब कॉपर की छड़ को सिल्वर नाइट्रेट विलयन में डालते हैं? (2014, 17) या
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी का प्रत्येक तत्त्व अपने से नीचे स्थित तत्त्वों को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है। श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है, अत: यह AgNO से निम्नलिखित क्रिया देगा Cu (s) + 2Ag(NO3) → Cu2+ + 2NO3 + 2Ag↓
इस प्रकार विलयन में क्यूप्रिक आयन विद्यमान होने से विलयन का रंग नीला हो जाएगा।

प्रश्न 6.
जस्ता, कॉपर सल्फेट के विलयन से ताँबे को विस्थापित कर सकता है जबकि सोना ऐसा नहीं करता है। कारण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विद्युत रासायनिक श्रेणी में जस्ता, कॉपर से ऊपर स्थित है जबकि सोना, कॉपर से नीचे स्थित है। अतः इन धातुओं की सक्रियता का घटता हुआ क्रम Zn > Cu > Au है। हम जानते हैं कि अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।

Zn (जस्ता), कॉपर से अधिक क्रियाशील है। अत: Zn, कॉपर सल्फेट के विलयन में से कॉपर को विस्थापित कर देता है। परन्तु Au (सोना), Cu से कम क्रियाशील धातु है। अतः सोना, कॉपर को कॉपर सल्फेट विलयन से विस्थापित नहीं कर सकता है।
Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu
Au + CuSO4 → कोई क्रिया नहीं

प्रश्न 7.
कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया सम्भव हैं या नहीं – (2011, 15)
Hg + H2SO4 → HgSO4 + H
Cu + 2AgNO3 → Cu(NO3)2 + 2Ag
उत्तर:
अभिक्रिया Hg + H2SO4 → HgSO4 + H2 सम्भव नहीं है। क्योंकि विद्युत रासायनिक श्रेणी में Hg का स्थान H2 से नीचे है। अतः यह हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करेगी। अभिक्रिया Cu + 2AgNO3 → Cu (NO3)2 + 2Ag सम्भव है; क्योंकि वैद्युत रासायनिक श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है।

प्रश्न 8.
अयस्क व खनिज को परिभाषित कीजिए।अयस्क तथा खनिज में क्या अन्तर है? (2013)
या अयस्क व खनिज को स्पष्ट कीजिए। (2016)
उत्तर:
खनिज Minerals प्रकृति में पृथ्वी के अन्दर धातुएँ तथा उनके यौगिक जिस रूप में पाये जाते हैं, उनको खनिज कहते हैं। अयस्क Ores जिस खनिज से किसी धातु को प्रचुर मात्रा में कम व्यय पर आसानी से प्राप्त किया जा सके, उस खनिज को उस विशिष्ट धातु का अयस्क कहते हैं। खनिज तथा अयस्क में अन्तर सभी अयस्क खनिज होते हैं, परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।

प्रश्न 9.
निस्तापन क्रिया को उदाहरण देते हुए समझाइए। (2012, 16, 17)
उत्तर:
सान्द्रित अयस्क को उसके गलनांक के नीचे ताप पर वायु की अनुपस्थिति या कम मात्रा में गर्म करके उसमें से नमी, हाइड्रेशन जल तथा अन्य वाष्पशील पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं। इस प्रक्रम में अयस्क को बिल्कुल भी पिघलने नहीं दिया जाता है। धातु कार्बोनेटों तथा हाइड्रॉक्साइडों को गर्म करके कार्बन डाइ-ऑक्साइड तथा जल निष्कासित करके धातुई ऑक्साइडों को प्राप्त करना भी निस्तापन ही कहलाता है। निस्तापन प्रक्रम के फलस्वरूप अयस्क शुष्क तथा छिद्रमय (porous) हो जाता है।
उदाहरणार्थ:
बॉक्साइट (Al2O3 . 2H2O) अयस्क का निस्तापन करने पर उसमें उपस्थित हाइड्रोजन जल वाष्पित होकर बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 10.
भर्जन क्या है? यह क्रिया किन सान्द्रित अयस्कों के लिए प्रयोग में लायी जाती है? भर्जन को उदाहरण देते हुए समझाइए। (2012, 16)
या भर्जन क्रिया में प्रयुक्त होने वाली भट्ठी का नामांकित चित्र बनाइए तथा समीकरण दीजिए। (2017, 18)
या भर्जन क्या है ? कॉपर पायराइट के भर्जन में होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। (2014, 15, 17)
उत्तर:
सान्द्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ मिला करके उसके गलनांक के नीचे (बिना पिघलाये) वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में गर्म करने की क्रिया को भर्जन कहा जाता है। यह क्रिया मुख्यतः सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त की जाती है। भर्जन तथा निस्तापन में केवल इतना ही अन्तर होता है कि भर्जन निस्तापन की अपेक्षा कुछ अधिक ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में पूर्ण होती है।

भर्जन क्रिया के द्वारा अयस्क आंशिक या पूर्ण रूप से ऑक्सीकृत हो जाता है तथा अयस्क में उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक, ऐण्टीमनी आदि अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर वाष्पशील ऑक्साइडों के रूप में पृथक् हो जाती हैं। भर्जन की क्रिया को परावर्तनी भट्ठी में कराते हैं। [संकेत परावर्तनी भट्ठी का चित्र दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 2 के उत्तर में देखें।]
उदाहरणार्थ:
सान्द्रित कॉपर पायराइट (CuFeS2) को कम ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में परावर्तनी भट्ठी में गर्म करने पर निम्नलिखित अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं
2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2FeS + SO2 ↑
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O+ 2SO2 ↑
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2 ↑

अयस्क में उपस्थित S तथा As की अशुद्धियाँ वाष्पशील ऑक्साइडों में परिवर्तित हो जाती हैं।
S + O2 → SO2
4As + 3O2 → 2As2O3

प्रश्न 11.
निस्तापन तथा भर्जन में क्या अन्तर है? (2016)
उत्तर:
निस्तापन में अयस्क को निम्न ताप पर वायु की अनुपस्थिति (या कम मात्रा) में गर्म किया जाता है जबकि भर्जन में अयस्क को उच्च ताप पर (बिना पिघलाये) वायु की नियन्त्रित मात्रा में गर्म किया जाता है।

प्रश्न 12.
गालक किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए। किसी एक अम्लीय गालक की क्रिया को केवल रासायनिक समीकरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2011, 12, 15)
उत्तर:
वे पदार्थ जो अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों के साथ उच्च ताप पर क्रिया करके इन्हें सरलता से गलाकर अलग होने वाले पदार्थों के रूप में दूर कर देते हैं, गालक कहलाते हैं। सरलता से गलकर अलग होने वाले पदार्थों को धातुमल (slag) कहते हैं।
गालक दो प्रकार के होते हैं –
(1) अम्लीय गालक तथा
(2) क्षारीय गालक।
अम्लीय गालक की रासायनिक क्रिया सिलिकन डाइ-ऑक्साइड (SiO2) अम्लीय गालक है।

प्रश्न 13.
धातुमल किसे कहते हैं? समझाइए। (2011, 18)
उत्तर:
अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों की गालक से क्रिया के फलस्वरूप बने गलनीय पदार्थ को धातुमल कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
जब क्षारीय गालक MgCO2, अम्लीय अशुद्धि SiO2 के साथ क्रिया करता है, तो मैग्नीशियम सिलिकेट धातुमल के रूप में पृथक् हो जाता है।

प्रश्न 14.
प्रगलन पर टिप्पणी लिखिए। या प्रगलन को उदाहरण सहित समझाइए। (2012)
उत्तर:
निस्तापन तथा भर्जन क्रिया के उपरान्त प्राप्त अयस्क को कोक तथा उचित गालक (flux) के साथ मिलाकर मिश्रण को उच्च ताप तक गर्म करके गलाने (पिघलाने) की क्रिया को प्रगलन कहते हैं। प्रगलन क्रिया को वात्या भट्ठी में सम्पन्न कराते हैं। इस क्रिया में कोक प्रायः अपचायक का कार्य करता है तथा अयस्क को गलित धातु में परिवर्तित कर देता है।
उदाहरणार्थ:
हेमेटाइट (Fe2O3) से आयरन की प्राप्ति के लिए सान्द्रित, निस्तापित एवं भर्जित अयस्क में कोक तथा चूने का पत्थर (गालक) मिलाकर वात्या भट्ठी में गर्म करते हैं। इस क्रिया में Fe2O3, Fe में परिवर्तित हो जाता है –
Fe2O2 + 3C → 2Fe + 3CO↑
Fe2O3+ 3CO → 2Fe + 3CO2

प्रश्न 15.
वात्या भट्ठी का नामांकित चित्र बनाइए। (2011)
उत्तर:
वात्या भट्ठी (Blast Furnace)

प्रश्न 16.
फफोलेदार ताँबे के शोधन की विद्युत अपघटनी विधि बताइए। या फफोलेदार कॉपर से शुद्ध कॉपर धातु प्राप्त करने की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए। (2011, 12, 15)
या फफोलेदार कॉपर से शुद्ध कॉपर धातु प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इस विधि में अशुद्ध (crude) ताँबे की प्लेटें ऐनोड का कार्य करती हैं और कैथोड शुद्ध कॉपर की प्लेटें होती हैं (चित्र)। विद्युत-अपघट्य कॉपर सल्फेट का अम्लीय विलयन होता है। विद्युत-धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध कॉपर कैथोड पर जमा हो जाता है। ऐनोड के नीचे कुछ अशुद्धियाँ, जिनमें सिल्वर, गोल्ड आदि धातुएँ होती हैं, जमा हो जाती हैं। इन्हें ऐनोड मड (anodic mud) कहते हैं। शेष अशुद्धियाँ घोल में सल्फेट के रूप में आ जाती हैं; जैसे निकिल, आयरन, जिंक आदि। विद्युत-अपघटन में 1.3 वोल्ट का विभवान्तर प्रयोग किया जाता है। इस विधि के द्वारा शोधित कॉपर 99.96-99.99% तक शुद्ध होता है।

प्रश्न 17.
कॉपर पर सान्द्र H2SO4 तथा सान्द्र HNO3 की अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। (2011, 14, 15)
या क्या होता है जब कॉपर को सान्द्र गन्धक (सल्फ्यूरिक अम्ल) के साथ गर्म करते हैं? (2016, 17)
उत्तर:

  1. सान्द्र H2SO4 से क्रिया कॉपर सल्फेट व सल्फर डाइ-ऑक्साइड गैस बनती है।
  2. सान्द्र HNO3 से क्रिया नाइट्रोजन डाइ-ऑक्साइड व कॉपर नाइट्रेट बनते हैं।

प्रश्न 18.
बेसेमर परिवर्तक का नामांकित चित्र बनाइए। (2015)
उत्तर:

प्रश्न 19.
बॉक्साइट से ऐलुमिना प्राप्त करने की सरपेक विधि का वर्णन समीकरण देते हुए कीजिए। (2017)
उत्तर:
जब बॉक्साइट में सिलिका की अशुद्धि अधिक होती है, तो उसका शोधन सरपेक विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में बॉक्साइट में कार्बन मिलाकर, मिश्रण को नाइट्रोजन की धारा में 1800°C पर गर्म किया जाता है, जिससे ऐलुमिनियम नाइट्राइड बन जाता है और बॉक्साइट में उपस्थित सिलिका का वाष्पशील सिलिकन में अपचयन हो जाता है।

ऐलुमिनियम नाइट्राइड को जल के साथ गर्म किया जाता है, जिससे वह ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड और अमोनिया में अपघटित हो जाता है।

ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड को अलग करके तेज गर्म करते हैं, जिससे वह ऐलुमिना में अपघटित हो जाता है और इस प्रकार शुद्ध निर्जल ऐलुमिना प्राप्त होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
धातुओं की सक्रियता श्रेणी क्या है ? हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय एवं दूसरा कम सक्रिय ऐसे एक-एक धातु का नाम लिखिए। (2012, 16)
या विद्युत रासायनिक श्रेणी क्या है ? इसके दो प्रमुख अनुप्रयोग दीजिए। (2011)
उत्तर:
धातुओं की सक्रियता श्रेणी (विद्युत रासायनिक श्रेणी) वह सूची है जिसमें धातुओं को क्रियाशीलता के अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। विस्थापन के प्रयोगों के बाद निम्न श्रेणी को विकसित किया गया है जिसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं।
सारणी:
सक्रियता श्रेणी-धातुओं की सापेक्ष अभिक्रियाशीलताएँ पोटैशियम –

अनुप्रयोग:
1. विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं की अभिक्रियाशीलता की तुलना की जा सकती है।
2. विद्युत रासायनिक श्रेणी की सहायता से विभिन्न धातुओं द्वारा अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाने की क्षमता की जानकारी प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
ताँबे के (कॉपर पायराइट के अतिरिक्त) दो मुख्य अयस्कों के नाम व सूत्र लिखिए। कॉपर पायराइट से ताँबे के निष्कर्षण की विधि को मुख्य पदों व समीकरणों सहित समझाइए। (2014)
या कॉपर के निष्कर्षण में भर्जन तथा प्रगलन में होने वाली अभिक्रियाओं को समझाइए। आवश्यक समीकरण भी दीजिए। (2013)
या परावर्तनी भट्ठी का सचित्र वर्णन कीजिए। कॉपर के निष्कर्षण में इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का समीकरण लिखिए। कॉपर के धातुकर्म में प्रयुक्त भर्जन क्रिया को सचित्र या समझाइए।
या कॉपर के दो प्रमुख अयस्कों के नाम लिखिए। बेसेमरीकरण को सचित्र समझाइए एवं अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण दीजिए। (2011, 15)
या कॉपर पायराइट से फफोलेदार ताँबा प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए। सम्बन्धित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए। द्रवित मैट से शुद्ध ताँबा कैसे प्राप्त करेंगे? (2011)
या ताँबे के मुख्य अयस्क का नाम तथा सूत्र लिखिए। इसके सान्द्रण की विधि का वर्णन कीजिए। (2009)
या बेसेमरीकरण में प्रयुक्त रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2014)
या बेसेमरीकरण पर टिप्पणी लिखिए। (2016)
या फेन-प्लवन विधि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2018)
उत्तर:
ताँबे का मुख्य अयस्क कॉपर पायराइट (CuFeS2) है। कॉपर पायराइट के अतिरिक्त कॉपर के दो प्रमुख अयस्क कॉपर ग्लान्स (Cu2S) तथा क्यूप्राइट (Cu2O) हैं।

कॉपर का निष्कर्षण Extraction of Copper कॉपर का निष्कर्षण मुख्यत: सल्फाइड अयस्कों से किया जाता है। कॉपर पायराइट (CuFes,) कॉपर का मुख्य सल्फाइड अयस्क है। कॉपर पायराइट से कॉपर प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम अयस्क के बड़े-बड़े टुकड़ों को हथौड़ों से पीटकर, दलित्र द्वारा या स्टैम्प मिल के प्रयोग से एक महीन चूर्ण के रूप में प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद निम्नलिखित प्रक्रम किये जाते हैं

1. अयस्क का सान्द्रण Concentration of the ore सल्फाइड अयस्क का सान्द्रण फेन वाय प्लवन (froth floatation) विधि द्वारा किया जाता है। बारीक पिसे सल्फाइड अयस्क को जल से भरे हुए एक अयस्क टैंक में डाल दिया जाता है और उसमें थोड़ा चीड़ का जल 100086000 तेल और पोटैशियम एथिल जैन्थेट मिलाकर वायु की का तेज धारा प्रवाहित की जाती है। सल्फाइड अयस्क के। कण तेल से भीगकर द्रव की सतह पर फेन (झाग) में अशुद्धियाँ एकत्रित हो जाते हैं और अशुद्धियाँ जल से भीगकर टैंक के पेंदे में बैठ जाती हैं। सान्द्रित अयस्क को अलग कर लेते हैं।

2. सान्द्रित अयस्क का भर्जन Roasting of the concentrated ore कॉपर पायराइट के सान्द्रित अयस्क को परावर्तनी भट्ठी (reverberatory furnace) में रख कर कम ताप तथा नियन्त्रित वायु (controlled air) की उपस्थिति में इतना गर्म किया जाता है कि वह बिना पिघले ऑक्सीकृत हो जाये। इस प्रकार सान्द्रित अयस्क का

भर्जन हो जाता है। अयस्क में उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक तथा ऐण्टिमनी के अपद्रव्य ऑक्सीकृत होकर अपने ऑक्साइड बनाते हैं जो वाष्प के रूप में अलग हो जाते हैं।
S + O2 → SO
4As + 3O2 → 2AS2O3
कॉपर पायराइट ऑक्सीकृत होकर कॉपर सल्फाइड (Cu2S), फेरस सल्फाइड (FeS) तथा सल्फर डाइ-ऑक्साइड (SO2) बनाता है।
2CuFeS2 + O2 → Cu2S + 2Fes + SO2 ↑
कॉपर सल्फाइड तथा फेरस सल्फाइड का कुछ भाग कॉपर ऑक्साइड (Cu2O) तथा फेरस ऑक्साइड (FeO) में बदल जाता है।

2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O+ 2SO2
2FeS + 3O2→ 2FeO+ 2SO2 ↑

3. भर्जित अयस्क का प्रगलन (Smelting of the roasted ore) भर्जित अयस्क को रेत तथा कोक में मिलाकर ऊँचे ताप पर वात्या भट्ठी (blast furnace) में पिघलाया जाता है। रेत में SiO अधिकता में तथा कोक में कार्बन होता है। इस क्रिया को भर्जित अयस्क का प्रगलन कहते हैं। कॉपर पायराइट के भर्जित अयस्क के प्रगलन के फलस्वरूप उसमें उपस्थित Cu2O तथा Fes निम्न प्रकार से अभिक्रिया करते हैं

(i) क्यूप्रस ऑक्साइड फेरस सल्फाइड से क्रिया करके क्यूप्रस सल्फाइड में बदल जाता है।
Cu2O + Fes → Cu2S + FeO↑

(ii) फेरस सल्फाइड की पर्याप्त मात्रा फेरस ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाती है।
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2

इस प्रकार प्राप्त Feo, प्रयुक्त गालक (SiO2) के साथ अभिक्रिया करके आयरन सिलिकेट बनाता है जो धातुमल (slag) कहलाता है। सिलिका गालक का कार्य करता है।

क्यूप्रस सल्फाइड और फेरस सल्फाइड का गलित मिश्रण जिसे द्रवित मैट (matte) कहते हैं, भट्ठी के पेंदे में एकत्रित हो जाता है और मैट के ऊपर गलित धातुमल की परत जमा हो जाती है। मैट को निकास द्वार से बाहर निकाल लिया जाता है।

4. बेसेमरीकरण (Bessemerisation) प्रगलन से प्राप्त गलित मैट में थोड़ी क्वार्ट्स (सिलिका) मिलाकर एक बेसेमर परिवर्तक में भर दिया जाता है और उसमें वायु का झोंका प्रवाहित किया जाता है। गलित मैट और क्वार्ट्स के मिश्रण में वायु का झोंका प्रवाहित करने पर निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं

(i) मैट में उपस्थित फेरस सल्फाइड फेरस ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
2Fes + 3O2 → 2FeO + 2SO2
(ii) FeO सिलिका से संयोग करके आयरन सिलिकेट बनाता है जो धातुमल कहलाता है। यह हल्का होने के कारण ऊपर आ जाता है।

(iii) अप्रयुक्त सिलिका को बेसेमर परिवर्तक का बेसिक स्तर अवशोषित कर लेता है।

(iv) क्यूप्रस सल्फाइड का कुछ भाग क्यूप्रस ऑक्साइड में बदल जाता है। यह पुन: क्यूप्रस सल्फाइड से क्रिया करके फफोलेदार ताँबा (blister copper) बनाता है।

प्रश्न 3.
ऐलुमिनियम के दो अयस्कों के नाम तथा सूत्र दीजिए। बॉक्साइट के शद्धिकरण की किसी एक विधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए। ऐलुमिना से धातु को कैसे प्राप्त किया
जाता है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के दो प्रमुख अयस्क बॉक्साइट व क्रायोलाइट हैं। ऐलुमिनियम का निष्कर्षण बॉक्साइट (Al2O3 : 2H2O) से किया जाता है। बॉक्साइट में फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3), सिलिका (SiO2) तथा अन्य अपद्रव्य मिले होते हैं। बॉक्साइट से ऐलुमिनियम का निष्कर्षण निम्न पदों में किया जाता है

1. बॉक्साइट का शोधन बॉक्साइट का शोधन हॉल की विधि द्वारा किया जाता है हॉल विधि (Hall’s process) इस विधि में बॉक्साइट में सोडियम कार्बोनेट मिलाकर मिश्रण को गलाया जाता है, जिससे ऐलुमिनियम ऑक्साइड सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट में बदल जाता है।
गलित मिश्रण को जल के साथ गर्म करके छान लिया जाता है। सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट विलयन में आ जाता है और फेरिक ऑक्साइड, सिलिका आदि की अशुद्धियाँ अविलेय पदार्थ के रूप में अलग हो जाती सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट विलयन को 30 – 60°C तक गर्म करके उसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड अवक्षेपित हो जाता है जिसे छान लेते हैं।

अवक्षेप को जल से धोकर सुखाते हैं और फिर तेज गर्म करते हैं, जिससे ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड ऐलुमिनियम ऑक्साइड (ऐलुमिना) में अपघटित हो जाता है और इस प्रकार शुद्ध निर्जल ऐलुमिना प्राप्त होता है।

2. ऐलुमिना का विद्युत्-अपघटन शुद्ध और निर्जल ऐलुमिना (Al2O3) से ऐलुमिनियम धातु हॉल (C.M. Hall, 1886) और हैरॉल्ट (Heroult) द्वारा प्रस्तुत विद्युत्-अपघटनी विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है। शुद्ध निर्जल ऐलुमिना को गलित क्रायोलाइट (Cryolite, Na3 AlF6) में घोलकर गलित मिश्रण का 875 से 950°C पर कार्बन इलेक्ट्रोडों के बीच विद्युत्-अपघटन करने पर कैथोड पर ऐलुमिनियम निक्षेपित (deposit) होता है और ऐनोड पर ऑक्सीजन निकलती है।

विद्युत्-अपघटनी सेल (संलग्न चित्र) 8 फीट लम्बा और 6 फीट चौड़ा लोहे का बक्स होता है, जिसके अन्दर गैस कार्बन का अस्तर लगा होता है जो कैथोड का कार्य करता है। ऐनोड कई ग्रेफाइट की छड़ों का बना होता है जो ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण में डूबी रहती हैं। विद्युत्-अपघटनी सेल से समानान्तर क्रम (parallel) में एक विद्युत् लैम्प जुड़ा रहता है, जिसे नियन्त्रक लैम्प (controlling lamp) कहते हैं। गलित मिश्रण का विद्युत्-अपघटन करने पर ऐलुमिना की मात्रा घटने लगती है, जिसके फलस्वरूप सेल का प्रतिरोध बढ़ने लगता है।

जैसे ही सेल में ऐलुमिना समाप्त होने को होता है नियन्त्रक लैम्प जलने लगता है, क्योंकि सेल का प्रतिरोध बहुत बढ़ जाता है। ऐसा होने पर सेल में और निर्जल ऐलुमिना डाल दिया जाता है। निर्जल ऐलुमिना और क्रायोलाइट का गलित मिश्रण विद्युत्-अपघट्य का कार्य करता है। इसका ताप 875 – 950°C रखा जाता है। निर्जल ऐलुमिना (Al2O3) का गलनांक (2050°C) बहुत ऊँचा होता है, परन्तु उसमें क्रायोलाइट (Na3 AIF6 ) मिला देने से ऐलुमिना अपेक्षाकृत कम ताप पर (875 – 900°C) पिघल जाता है। विद्युत्-अपघटन लगभग 35000 ऐम्पियर (ampere) की विद्युत्-धारा द्वारा 4 – 5 वोल्ट की वोल्टता (voltage) पर किया जाता है।

शुद्ध निर्जल ऐलुमिना और क्रायोलाइट का मिश्रण विद्युत्-अपघटनी सेल में भरकर विद्युत्-धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे क्रायोलाइट पिघल जाता है और उसमें निर्जल ऐलुमिना घुल जाता है। गलित क्रायोलाइट में ऐलुमिना के विलयन का विद्युत अपघटन होता है। कैथोड पर ऐलुमिनियम निक्षेपित होता है और ऐनोड पर ऑक्सीजन निकलती है। गलित अवस्था में ऐलुमिनियम सेल की तली में एकत्रित हो जाता है जिसे बाहर निकाल लेते हैं।

ग्रेफाइट ऐनोडों पर मुक्त हुई ऑक्सीजन से ग्रेफाइट की छड़ें क्रिया करती हैं जिससे कार्बन मोनोक्साइड (CO) बनती है, जिसके जलने से चमक उत्पन्न होती है और CO2 बनती है। अत: ग्रेफाइट की ऐनोड छड़ें खराब हो जाती हैं और उनको बदलना पड़ता है। विद्युत्-अपघटन करने से पहले ऐलुमिना और क्रायोलाइट के गलित मिश्रण में पिसा हुआ कार्बन डाल दिया जाता है जिससे ऊष्मा की हानि नहीं होती तथा आँखों में चमक नहीं लगती है। क्रायोलाइट की उपस्थिति में गलित ऐलुमिना के विद्युत्-अपघटन से लगभग 99.8% शुद्ध ऐलुमिनियम प्राप्त होता है।

ऐलुमिनियम का शोधन ऐलुमिनियम का शोधन विद्युत्-अपघटनी विधि, हूप विधि (Hoope’s process) द्वारा किया जाता है। इस विधि में कार्बन का अस्तर लगे हुए एक आयरन के टैंक में सबसे नीचे (bottom) गलित अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत, मध्य में (middle) सोडियम, बेरियम और ऐलुमिनियम के फ्लु ओराइडों के गलित मिश्रण की परत और सबसे ऊपर (top) गलित शुद्ध ऐलुमिनियम की परत होती है (संलग्न चित्र) ऊपर की परत का आपेक्षिक घनत्व सबसे कम और नीचे (bottom) की परत का आपेक्षिक घनत्व सबसे अधिक होता है।

अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत ऐनोड का और शुद्ध ऐलुमिनियम की परत कैथोड का कार्य करती है। सोडियम, बेरियम और ऐलुमिनियम के फ्लुओराइडों का गलित मिश्रण विद्युत्-अपघट्य (electrolyte) का कार्य करता है। शुद्ध ऐलुमिनियम की परत में लटकी हुई ग्रेफाइट की छड़ें व अशुद्ध ऐलुमिनियम की परत के सम्पर्क में स्थित कॉपर-ऐलुमिनियम मिश्र धातु की छड़ चालक का कार्य करती है।

विद्युत्-धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ऐलुमिनियम बीच की परत से ऊपर की परत में कैथोड पर एकत्रित होता है और उतना ही ऐलुमिनियम नीचे (bottom) की परत से बीच की परत में आ जाता है। इस प्रकार शुद्ध ऐलुमिनियम नीचे की परत (ऐनोड) से ऊपर की परत (कैथोड) में आ जाता है और अशुद्धियाँ नीचे रह जाती हैं। इस विधि द्वारा प्राप्त ऐलुमिनियम 99.98% शुद्ध होता है।

प्रश्न 4.
मिश्र धातु किसे कहते हैं ? कॉपर की दो प्रमुख मिश्र धातुओं के नाम, संघटन व उपयोग दीजिए। (2010, 13, 14, 16, 18)
या मिश्र धातु किसे कहते हैं ? कोई एक उदाहरण दीजिए। (2009, 11)
या मिश्र धातु से आप क्या समझते हैं? धातु एवं उसकी मिश्र धातु के गुणों में प्रमुख भिन्नता क्या है?
उत्तर:
“जब दो या दो से अधिक धातुओं को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर पिघलाया जाता है तो ये धातुएँ परस्पर मिल जाती हैं और एक समांग मिश्रण बनाती हैं। ऐसे मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं।” इन मिश्र धातुओं के भौतिक गुण मूल धातुओं के भौतिक गुणों से बिल्कुल भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए-मिश्र धातु पीतल, जिसमें 2 भाग ताँबा व एक भाग जस्ता होता है, ताँबा व जस्ता की अपेक्षा अधिक कड़ा होता है।

मिश्र धातु बनाते समय यदि विभिन्न धातुओं को धीरे-धीरे गर्म किया जाये और फिर उन्हें धीरे-धीरे ठण्डा होने दिया जाये तो नरम मिश्र धातु प्राप्त होती है। यदि धातुओं को शीघ्रता से गर्म करके फिर शीघ्रता से ठण्डा किया जाये तो मिश्र धातु कठोर और भंगुर होती है। इस प्रकार धातुओं से मिश्र धातु बनाने में उनकी कठोरता, वायु, जल आदि से क्रिया करने का गुण, चमक, रंग, मूल्य आदि बदल कर अधिक उपयोगी बन जाते हैं। कॉपर की दो प्रमुख मिश्र धातुएँ, उनकी संरचना (संघटन) तथा मुख्य उपयोग निम्नांकित सारणी में दिये गये हैं –


BSEB Textbook Solutions PDF for Class 10th


Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks for Exam Preparations

Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions can be of great help in your Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) exam preparation. The BSEB STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks study material, used with the English medium textbooks, can help you complete the entire Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Books State Board syllabus with maximum efficiency.

FAQs Regarding Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Solutions


How to get BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook Answers??

Students can download the Bihar Board Class 10 Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Answers PDF from the links provided above.

Can we get a Bihar Board Book PDF for all Classes?

Yes you can get Bihar Board Text Book PDF for all classes using the links provided in the above article.

Important Terms

Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals), BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks, Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals), Bihar Board Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook solutions, BSEB Class 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions, Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals), BSEB STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks, Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals), Bihar Board STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbook solutions, BSEB STD 10th Science Chapter 3 धातु एवं अधातु (Metals and Non-metals) Textbooks Solutions,
Share:

0 Comments:

Post a Comment

Plus Two (+2) Previous Year Question Papers

Plus Two (+2) Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Physics Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Chemistry Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Maths Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Zoology Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Botany Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Computer Science Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Computer Application Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Commerce Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Humanities Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Economics Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) History Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Islamic History Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Psychology Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Sociology Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Political Science Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Geography Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Accountancy Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Business Studies Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) English Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Hindi Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Arabic Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus Two (+2) Kaithang Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus Two (+2) Malayalam Previous Year Chapter Wise Question Papers

Plus One (+1) Previous Year Question Papers

Plus One (+1) Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Physics Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Chemistry Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Maths Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Zoology Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Botany Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Computer Science Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Computer Application Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Commerce Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Humanities Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Economics Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) History Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Islamic History Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Psychology Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Sociology Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Political Science Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Geography Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Accountancy Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Business Studies Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) English Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Hindi Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Arabic Previous Year Chapter Wise Question Papers, Plus One (+1) Kaithang Previous Year Chapter Wise Question Papers , Plus One (+1) Malayalam Previous Year Chapter Wise Question Papers
Copyright © HSSlive: Plus One & Plus Two Notes & Solutions for Kerala State Board About | Contact | Privacy Policy