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Monday, June 20, 2022

BSEB Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Textbook Solutions PDF: Download Bihar Board STD 11th Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Book Answers

BSEB Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Textbook Solutions PDF: Download Bihar Board STD 11th Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Book Answers
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Bihar Board Class 11th Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Textbooks Solutions PDF

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Bihar Board Class 11th Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Books Solutions

Board BSEB
Materials Textbook Solutions/Guide
Format DOC/PDF
Class 11th
Subject Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति
Chapters All
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Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Text Book Questions and Answers

अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.1
किसी वस्तु पर किसी बल द्वारा किए गए कार्य का चिह्न समझना महत्वपूर्ण है। सावधानीपूर्वक बताइए कि निम्नलिखित राशियाँ धनात्मक हैं या ऋणात्मक:

  1. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी से बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
  2. उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
  3. किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
  4. किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
  5. किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।

उत्तर:

  1. चूँकि रस्सी का विस्थापन तथा मनुष्य द्वारा लगाया गया बल दोनों ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर दिष्ट हैं। अत: कार्य धनात्मक होगा।
  2. चूँकि गुरुत्वीय बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  3. चूँकि घर्षण बल व बाल्टी का विस्थापन विपरीत दिशा में है। अतः घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
  4. चूँकि वस्तु पर लगाया गया बल, वस्तु की गति की दिशा में है। अतः कृतं कार्य धनात्मक होगा।
  5. चूँकि वायु का प्रतिरोधी बल सदैव गति के विपरीत दिशा में है अत: कार्य ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 6.2
2 kg द्रव्यमान की कोई वस्तु जो आरंभ में विरामावस्था में है, 7N के किसी क्षैतिज बल के प्रभाव से एक मेज पर गति करती है। मेज का गतिज-घर्षण गुणांक 0.1 है। निम्नलिखित का परिकलन कीजिए और अपने परिणामों की व्याख्या कीजिए।
(a) लगाए गए बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य।
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन।
उत्तर:
दिया है:
बल, F = 7 न्यूटन,
m = 2 किग्रा, µ = 0, µk = 0.1
चूँकि गति क्षैतिज मेज पर हो रही है।
अतः घर्षण बल, µkR = µk mg
= 0.1 × 2 × 10 = 2 न्यूटन
अतः पिण्ड पर गति की दिशा में नेट बल,
F1 = F – µkN
= 7 – 2 = 5 न्यूटन
सूत्र F1 = ma से,
त्वरण,
a = 𝐹1𝑚 = 52
= 2.5 मीटर/सेकण्ड2
अतः 10 सेकण्ड में चली दूरी,
सूत्र S = ut + 12 at2 से,
S = 0 × 10 + 1 × 2.5 × 102
= 125 मीटर

(a) आरोपित बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W1 = F.S cos 0°
= 7 × 125
= 875 जूल

(b) घर्षण बल द्वारा 10 सेकण्ड में किया गया कार्य,
W2 = -(µkR).S
= -2 × 25
= -250 जूल
चूँकि विस्थापन घर्षण बल के विरुद्ध है। इसी कारण यह कार्य ऋणात्मक है।

(c) सम्पूर्ण बल द्वारा कृत कार्य,
W = सम्पूर्ण बल × कुल विस्थापन
= 5 × 125
= 625 न्यूटन

(d) कार्य ऊर्जा प्रमेय से,
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन,
∆K = सम्पूर्ण बल द्वारा किया गया कार्य
= 625 न्यूटन।
यहाँ गतिज ऊर्जा में कुल परिवर्तन बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य से कम है। इसका कारण यह है कि बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य का कुछ भाग घर्षण प्रभाव को समाप्त करने में कम होता है।

प्रश्न 6.3
चित्र में कुछ एकविमीय स्थितिज ऊर्जा-फलनों के उदाहरण दिए गए हैं। कण की कुल ऊर्जा कोटि-अक्ष पर क्रॉस द्वारा निर्देशित की गई है। प्रत्येक स्थिति में, कोई ऐसे क्षेत्र बताइए, यदि कोई हैं तो जिनमें दी गई ऊर्जा के लिए, कण को नहीं पाया जा सकता। इसके अतिरिक्त, कण की कुल न्यूनतम ऊर्जा भी निर्देशित कीजिए। कुछ ऐसे भौतिक सन्दर्भो के विषय में सोचिए जिनके लिए ये स्थितिज ऊर्जा आकृतियाँ प्रासंगिक हों।
उत्तर:
∵ KE + P.E. = E (constant)
∴ K.E. = E – P.E.

(a) इस ग्राफ में x < a के लिए स्थितिज ऊर्जा वक्र, दूरी अक्ष



के साथ सम्पाती (P.E. = 0) जबकि x > a के लिए स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा से अधिक है; अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक हो जाएगी जो कि असम्भव है।
अतः कण x > a क्षेत्र में नहीं पाया जा सकता।

(b) इस ग्राफ से स्पष्ट है कि प्रत्येक स्थान पर P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी जो कि असम्भव है; अतः कण को कहीं भी नहीं पाया जा सकता।

(c) 0 < x < a तथा b < x क्षेत्रों में P.E. > E
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी; अतः कण को इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

(d) –𝑏2 < x < 𝑎2 तथा < x < 𝑏2 क्षेत्रों में P.E. > E;
अतः गतिज ऊर्जा ऋणात्मक होगी इसलिए कण इन क्षेत्रों में नहीं पाया जा सकता।

प्रश्न 6.4
रेखीय सरल आवर्त गति कर रहे किसी कण का स्थितिज ऊर्जा फलन V(x) = kx2/2 है, जहाँ k दोलक का बल नियतांक है। k = 0.5 Nm-1 के लिए V(x) व x के मध्य ग्राफ चित्र में दिखाया गया है। यह दिखाइए कि इस विभव के अंतर्गत गतिमान कुल 1J ऊर्जा वाले कण को अवश्य ही ‘वापिस आना’ चाहिए जब यह x = ± 2 m पर पहुँचता है।

उत्तर:
हम जानते हैं कि,
E = KE + PE
∴ E = 12 mv2 + 12 kx2 [∵ PE = v(x) = 𝑘𝑥22]
कण उस स्थिति x = xm से लौटना शुरू करेगा जबकि कण की गतिज ऊर्जा शून्य होगी।
इस प्रकार, 12 mv2 = 0 तथा x = xm पर,
E = 12 kx2m
दिए है: E = 1 जूल व k = 0.5 न्यूटन/मीटर
∴ 1 = 12 × 0.5 × x2m
या 𝑥2𝑚 = 20.5 = 4
∴ xm = ± 2 मीटर
इस प्रकार कण x = ± 2 मीटर पर पहुँचने पर ही वहाँ से वापस लौटना प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 6.5
निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) किसी रॉकेट का बाह्य आवरण उड़ान के दौरान घर्षण के कारण जल जाता है। जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा किसके व्यय पर प्राप्त की गई-रॉकेट या वातावरण?
(b) धूमकेतु सूर्य के चारों ओर बहुत ही दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। साधारणतया धूमकेतु पर सूर्य का गुरुत्वीय बल धूमकेतु के लंबवत् नहीं होता है। फिर भी धूमकेतु की संपूर्ण कक्षा में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है। क्यों?
(c) पृथ्वी के चारों ओर बहुत ही क्षीण वायुमण्डल में घूमते हुए किसी कृत्रिम उपग्रह की ऊर्जा धीरे-धीरे वायुमण्डलीय प्रतिरोध (चाहे यह कितना ही कम क्यों न हो) के विरुद्ध क्षय के कारण कम होती जाती है फिर भी जैसे-जैसे कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है तो उसकी चाल में लगातार वृद्धि क्यों होती है?

(d) चित्र (i) में एक व्यक्ति अपने हाथों में 15 kg का कोई द्रव्यमान लेकर 2 m चलता है। चित्र (ii) में वह उतनी ही दूरी अपने पीछे रस्सी को खींचते हुए चलता है। रस्सी घिरनी पर चढ़ी हुई है और उसके दूसरे सिरे पर 15 kg का द्रव्यमान लटका हुआ है। परिकलन कीजिए कि किस स्थिति में किया गया कार्य अधिक है?
उत्तर:
(a) बाहरी आवरण के जलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा रॉकेट की यान्त्रिक ऊर्जा से प्राप्त होती है।

(b) धूमकेतु पर सूर्य द्वारा लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल एक संरक्षी बल है। संरक्षी बल के द्वारा बन्द पथ में गति करने वाले पिण्ड पर किया गया नेट कार्य शून्य होता है। इस प्रकार धूमकेतु की सम्पूर्ण कक्षा में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होगा।

(c) जैसे – 2 उपग्रह पृथ्वी के समीप आता है वैसे – 2 उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा कम होती है। ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती रहती है। अतः उसकी चाल बढ़ती जाती है। कुल ऊर्जा का कुछ भाग घर्षण बल के विरुद्ध कार्य करने में खर्च हो जाता है।

(d) चित्र (i) में स्थिति में, व्यक्ति द्रव्यमान को उठाए रखने के लिए भार के विरुद्ध ऊपर की ओर बल लगाता है जबकि उसका विस्थापन क्षैतिज दिशा में है (i.e., θ = 90)
अतः मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = Fs cos 90° = 0
चित्र (ii) स्थिति में, घिरनी मनुष्य द्वारा लगाए गए क्षैतिज बल की दिशा को ऊर्ध्वाधर कर देती है व द्रव्यमान का विस्थापन भी ऊपर की ओर है (i. e., θ = 0°)
अत: मनुष्य द्वारा किया गया कार्य,
W = mgh cos 0°
= 15 × 20 × 1
= 300 जूल।

प्रश्न 6.6
सही विकल्प को रेखांकित कीजिए:

  1. जब कोई संरक्षी बल किसी वस्तु पर धनात्मक कार्य करता है तो वस्तु की स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है/घटती है/अपरिवर्ती रहती है।
  2. किसी वस्तु द्वारा घर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य का परिणाम हमेशा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा में क्षय होता है।
  3. किसी बहुकण निकाय के कुल संवेग-परिवर्तन की दर निकाय के बाह्य बल/आंतरिक बलों के जोड़ के अनुक्रमानुपाती होती है।
  4. किन्हीं दो पिंडों के अप्रत्यास्थ संघट्ट में वे राशियाँ, जो संघट्ट के बाद नहीं बदलती हैं; निकाय की कुल गतिज ऊर्जा/कुल रेखीय संवेग/कुल ऊर्जा हैं।

उत्तर:

  1. घटती है, चूँकि संरक्षी बल के विरुद्ध किया गया कार्य ही स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होता है।
  2. गतिज ऊर्जा, चूँकि घर्षण के विरुद्ध कार्य तभी होता है जबकि गति हो रही है।
  3. बाह्य बल, चूँकि बहुकण निकाय में, आन्तरिक बलों का परिणामी शून्य होता है एवम् आन्तरिक बल संवेग परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होते हैं।
  4. कुल रेखीय संवेग तथा कुल ऊर्जा भी जबकि दो पिंडों का निकास वियुक्त है।

प्रश्न 6.7
बतलाइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। अपने उत्तर के लिए कारण भी दीजिए।

  1. किन्हीं दो पिंडों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, प्रत्येक पिंड का संवेग व ऊर्जा संरक्षित रहती है।
  2. किसी पिंड पर चाहे कोई भी आंतरिक व बाह्य बल क्यों न लग रहा हो, निकाय की कुल ऊर्जा सर्वदा संरक्षित रहती है।
  3. प्रकृति में प्रत्येक बल के लिए किसी बंद लूप में, किसी पिंड की गति में किया गया कार्य शून्य होता है।
  4. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट में, किसी निकाय की अंतिम गतिज ऊर्जा, आरंभिक गतिज ऊर्जा से हमेशा कम होती है।

उत्तर:

  1. असत्य
  2. सत्य
  3. असत्य
  4. सत्य।

प्रश्न 6.8
निम्नलिखित का उत्तर ध्यानपूर्वक, कारण सहित दीजिए:

  1. किन्हीं दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट में, क्या गेंदों के संघट्ट की अल्पावधि में (जब वे संपर्क में होती है) कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है?
  2. दो गेंदों के किसी प्रत्यास्थ संघट्ट की लघु अवधि में क्या कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है?
  3. किसी अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए प्रश्न (a) व (b) के लिए आपके उत्तर क्या हैं?
  4. यदि दो बिलियर्ड-गेंदों की स्थितिज ऊर्जा केवल उनके केंद्रों के मध्य, पृथक्करण-दूरी पर निर्भर करती है तो संघट्ट प्रत्यास्थ होगा या अप्रत्यास्थ? (ध्यान दीजिए कि यहाँ हम संघट्ट के दौरान बल के संगत स्थितिज ऊर्जा की बात कर रहे हैं, ना कि गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा की)

उत्तर:

  1. नहीं, चूँकि संघट्ट काल के दौरान गेंद सम्पीडित हो जाती है। अतः गतिज ऊर्जा, गेंदों की स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
  2. हाँ, संवेग संरक्षित रहता है।
  3. हाँ, दोनों उत्तर उपर्युक्त ही रहेंगे।
  4. चूँकि स्थितिज ऊर्जा केन्द्रों के मध्य दूरी पर निर्भर करती है इसका तात्पर्य यह है कि संघट्ट काल में पिंडों के मध्य लगने वाला संरक्षी बल है। अतः ऊर्जा संरक्षित रहेगी। अतः प्रत्यास्थ संघट्ट होगा।

प्रश्न 6.9
कोई पिंड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
a = नियत, µ = 0
∴ बल = ma, अचर होगा तथा = at होगा। ]
∴ शक्ति P = Fv = ma.at = ma2t
∴ P ∝ t
अतः विकल्प (ii) सत्य है।

प्रश्न 6.10
एक पिंड अचर शक्ति के स्त्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका t समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है –

  1. t1/2
  2. t
  3. t3/2
  4. t2

उत्तर:
शक्ति P = Fv अचर है।
∴ P = (ma)
v = m.𝑑𝑣𝑑𝑡.v
या 𝑣𝑑𝑣𝑑𝑡 = 𝑝𝑚
या vdv = 𝑝𝑚.dt
समाकलन करने पर, 𝑣22 = 𝑝𝑡𝑚 + c1
प्रारम्भ में, t = 0 पर v = 0
∴ a = 0
∴ 𝑣22 = 𝑝𝑚.t

समाकलन करने पर,
प्रारम्भ में, t = 0 पर s = 0

अतः विकल्प (iii) सही है।

प्रश्न 6.11
किसी पिंड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z – अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है।
F = (-𝑖̂ + 2𝑗̂ + 3𝑘̂ )N
जहाँ 𝑖̂ , 𝑗̂ , 𝑘̂ क्रमशः x – , y – एवं z – अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश हैं। इस वस्तु को 7 – अक्ष के अनुदिश 4m की दूरी तक गति कराने के लिए आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
𝐹⃗ = –𝑖̂ + 2𝑗̂ + 3𝑘̂ न्यूटन
चूँकि विस्थापन z – अक्ष के अनुदिश है।
अतः 𝑠⃗ = 4𝑖̂ मीटर
∴ बल द्वारा किया गया कार्य, W = 𝐹¯. 𝑆̂ 
= (-𝑖̂ + 2𝑗̂ + 3𝑘̂ .(4𝑘̂ )
= 12 जूल [∵𝑗̂ .𝑘̂ = 0 व 𝑘̂ .𝑘̂ = 1 इत्यादि]

प्रश्न 6.12
किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 kev है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 keV है। इनमें कौन-सा तीव्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 × 10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67 × 10-27 kg, 1ev = 1.60 × 10-19 J)
उत्तर:
दिया है:
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.11 × 10-31 किग्रा,
प्रोटॉन का द्रव्यमान mp = 1.67 × 10-27 किग्रा,
1eV = 1.6 × 10-19 जूल
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,
Kp = 100 KeV = 105eV
= 105 × 1.6 × 10-19J
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ke = 10 keV = 104 eV
= 104 × 1.6 × 10-19J
माना कि प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन की चाल क्रमशः vp, व ve हैं।
सूत्र गतिज ऊर्जा, K = 12 mv2 से,
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा,

इसी प्रकार,

चूँकि ve > vp
अर्थात् इलेक्ट्रॉन तीव्रगामी है।

प्रश्न 6.13
2 mm त्रिज्या की वर्षा की कोई बूंद 500 m की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरंभिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है, और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूंद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूंद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 ms-1 हो तो संपूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
वर्षा की बूंद की त्रिज्या, r = 2 मिमी
= 2 × 10-3 मीटर,
प्रारम्भिक ऊँचाईं, h = 500 मीटर
प्रारम्भिक चाल, u = 0
पृथ्वी तल पर बूंद की चाल, v = 10 मीटर/सेकण्ड
त्वरण, g = 9.8 मीटर/सेकण्ड2
जल का घनत्व ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
बूंद का द्रव्यमान, m = (43 πr3) × (ρ)
= 43 × 227 × (2 × 10-3)3 × 103
= 3.35 × 10-5 किग्रा
बूंद पर गुरुत्वीय बल,
F1 = mg = 3.35 × 10-5 × 9.8
= 3.28 × 10-4 न्यूटन
यात्रा के दोनों अर्धभाग समान हैं।
∴ h1 = h2 = ℎ2 = 250 मीटर
यात्रा के इन भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा कृत कार्य,
W1 = W2 = mgh1
= (3.28 × 10-4) × 250 = 0.082 जूल

वर्षा की बूँद की गतिज ऊर्जा में कुल वृद्धि,
∆K = K2 – K1
= 12 mv2 – 12 mu2
= 12 × 3.35 × 10-5 × (10)2 – 0
= 0.001 जूल

गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य,
Wg = W1 + W2
= 0.082 + 0.082
= 0.164 जूल

माना प्रतिरोधी बल द्वारा कुल कृत कार्य ωr है।
∴ नेट कार्य, W = Wg + Wr = ∆K (कार्य ऊर्जा प्रमेय से)
∴ ωr = ∆K – Wg
= 0.001 – 0.0164
= – 0.163 जूल

प्रश्न 6.14
किसी गैस-पात्र में कोई अणु 200 ms-1 की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षैतिज दीवार से टकराकर पुनः उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघट्ट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?
उत्तर:
दिया है:
θ = 30°, u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड दीवार से संघट्ट के बाद चाल,
v = u = 200 मीटर प्रति सेकण्ड
चूँकि प्रत्येक संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है। अतः इस संघट्ट में भी संवेग संरक्षित रहता है।
माना अणु का द्रव्यमान m है।
अतः दीवार से टकराते समय निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = 12 mu2 = 12 m (200)2 जूल
एवम् संघट्ट के बाद गतिज ऊर्जा,
K2 = 12 mv2 = 12 m (200)2 जूल
∴ K1 = K2
अतः यह एक प्रत्यास्थ संघट्ट है।

प्रश्न 6.15
किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पंप 30 m3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 m ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?
उत्तर:
दिया है:
टंकी की ऊँचाई, h = 40 मीटर
टंकी का आयतन, V = 30 मीटर3
लगा समय, t = 15 मिनट = 15 × 60 सेकण्ड, पम्प की दक्षता, η = 30%
जल का घनत्व, ρ = 103 किग्रा प्रति मीटर3
उठाए गए जल का द्रव्यमान,
m = V × ρ = 30 × 103
= 3 × 104 किग्रा
पम्प द्वारा टंकी भरने में खर्च की गई शक्ति,
P0 = 𝑊𝑡 = 𝑚𝑔ℎ𝑡
= 3×104×9.8×401.5×60 = 13066 वॉट
माना पम्प द्वारा उपयोग की गई शक्ति P1 है।

= 43553 वॉट
= 43.55 किलो वॉट।

प्रश्न 6.16
दो समरूपी बॉल बियरिंग एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बाल बियरिंग, जो आरंभ में V चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात् निम्नलिखित (चित्र) में कौन-सा परिणाम संभव है?

उत्तर:
माना प्रत्येक बॉल बियरिंग का द्रव्यमान m है।
अतः संघट्ट से पूर्व निकाय की गतिज ऊर्जा,
K1 = 12 mv2 + 0 + 0 = 12mv2
प्रथम स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,

अतः K1 > K2
द्वितीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की कुल ऊर्जा,

अतः K1 = K2
तृतीय स्थिति में, संघट्ट के पश्चात् निकाय की गतिज ऊर्जा,

प्रश्नानुसार संघट्ट प्रत्यास्थ है। अतः निकाय की गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी। चूँकि केवल द्वितीय स्थिति में ही गतिज ऊर्जा संरक्षित रहती है अर्थात् केवल यही परिणाम सम्भव होगा।

प्रश्न 6.17
किसी लोलक के गोलक A को, जो ऊर्ध्वाधर से 30° का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक B से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात् गोलक A कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघट्ट प्रत्यास्थ है।

उत्तर:
दोनों गोलक समरूप हैं तथा संघट्ट प्रत्यास्थ है; अतः संघट्ट के दौरान लटका हुआ गोलक अपना सम्पूर्ण संवेग नीचे रखे गोलक को दे देता है और जरा भी ऊपर नहीं उठता।

प्रश्न 6.18
किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लंबाई 1.5 m है तो निम्नतम बिंदु पर, आने पर गोलक की चाल क्या होगी? यह दिया गया है कि इसकी आरंभिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।
उत्तर:
निम्नतम बिन्दु P पर, लोलक में केवल स्थितिज ऊर्जा है। बिन्दु B पर, लोलक में केवल गतिज ऊर्जा है। इका अर्थ है कि जब लोलक P से Q पर पहुँचता है, तब स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
अतः बिन्दु Q पर KE = PE
लेकिन 5% स्थितिज ऊर्जा, वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाती है।

∴ Q पर गतिज ऊर्जा
= P पर स्थितिज ऊर्जा का 95% …… (1)
माना लोलक का द्रव्यमान = m
बिन्दु Q पर लोलक की चाल = v
तथा बिन्दु P की 0 के सापेक्ष ऊँचाई = h = 1.5 मीटर
∴ समी० (1) से,
12mv2 = 95100 × mgh
अथवा

= 5.29 मीटर/सेकण्ड
v = 5.3 मीटर।

प्रश्न 6.19
300 kg द्रव्यमान की कोई ट्राली, 25 kg रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 kmh-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात् बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 kg s-1 की दर से निकलकर ट्राली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् ट्रॉली की चाल क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि वेग एक समान है व ट्रॉली व रेत का बोरा एक ही निकाय के अंग हैं जिस पर कोई बाह्य बल नहीं लगा है अत: निकाय का रेखीय संवेग नियत रहेगा भले ही निकाय में किसी भी तरह का आन्तरिक परिवर्तन क्यों न हो जाए। इस प्रकार ट्रॉली की चाल 27 किमी प्रति घण्टा ही बनी रहेगी।

प्रश्न 6.20
0.5 kg द्रव्यमान का एक कण y = ax3/2 वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a = 5 m-1/2s-1 है। x = 0 से x = 2m तक इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 0.5 किग्रा
v = ax3/2
a = 5m-1/2 प्रति सेकण्ड
माना वस्तु पर F बल से a’ त्वरण उत्पन्न होता है।
∴ F = ma’ = 𝑚𝑑𝑣𝑑𝑡
माना वस्तु को dx दूरी विस्थापित करने पर किया गया कार्य dw है।
∴ dw = F.dx = m𝑑𝑣𝑑𝑡.dx
= m.dv. 𝑑𝑥𝑑𝑡 = mvdv ……………. (1)
माना वस्तु को x = 0 से x = 2 मीटर तक चलाने में किया गया कुल कार्य W है।
∴ समी० (1) से,
W = ∫dw = ∫mvdv

= 50 जूल

प्रश्न 6.21
किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल A के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं।
(a) यदि हवा वेग से वृत्त के लंबवत् दिशा में बहती है तो t समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान क्या होगा?
(b) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी?
(c) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है यदि A = 30 m2, और v = 36 kmh-1 और वायु का घनत्व 1.2 kgm-3 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
वायु का घनत्व, ρ = 1.2 किग्रा प्रति मीटर3,
वायु का वेग, v = 36 किमी/घण्टा
= 36 × 58 = 10 मीटर/सेकण्ड
= 30 मीटर2, समय, t = ?

(a) t समय में वृत्त से प्रवाहित वायु का आयतन,
V = A × vt
वृत्त से प्रवाहित वायु का द्रव्यमान,
m = vp = Avtρ

(b) इस वायु की गतिज ऊर्जा,
K = 12 mv2 = 12 (Avtρ) v3
= 12ρAv2t

(c) इस समय में पवन चक्की द्वारा उत्पन्न विद्युत ऊर्जा,
E = वायु की गतिज ऊर्जा का 25%
= (12 Aρv3t) × 25100 = 18 Aρv3t
अत: इस ऊर्जा द्वारा उत्पन्न विद्युत शक्ति,
P = 𝐸𝑡
= 18 Aρv3
= 18 × 30 × 1.2 × 103
= 4.5 विलोवॉट

प्रश्न 6.22
कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 kg द्रव्यमान को 0.5 m की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है।
(a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है?
(b) यदि वसा 3.8 × 107 J ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी वसा खर्च कर डालेगा?
उत्तर:
दिया है:
m = 10 किग्रा,
h = 0.5 मीटर
द्रव्यमान को उठाया गया, n = 1000 बार
(a) 10 किग्रा के द्रव्यमान को 1000 बार उठाने में किया गया कार्य,
W = n × mgh
= 1000 × 10 × 9.8 × 0.5
= 49000
= 49 किलो जूल

(b) 1 किग्रा वसा द्वारा प्रदत्त यान्त्रिक ऊर्जा
= 3.8 × 107 जूल का 20%
= 3.8 × 107 × 20100
= 3.85 × 107 जूल
इसलिए (3.85 × 107) जूल ऊर्जा मिलती है = 1 किग्रा वसा से,
∴ 1 जूल ऊर्जा मिलती है = 53.8×107 किग्रा वसा से
∴ 49000 जूल ऊर्जा मिलती है,
= 53.8×107 × 49000 किग्रा वसा से
= 6.45 × 10-3 किग्रा वसा से

प्रश्न 6.23
कोई परिवार 8 kW विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है।
(a) किसी क्षैतिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm-2 है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 8 KW की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी?
(b) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
उपभोग की गई विद्युत शक्ति = 8 KW
(a) सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 वॉट/मीटर2
उपयोगी विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण दर = 20%
8 किलो वॉट के लिए आवश्यक क्षे० = ?
प्रति वर्ग मीटर क्षेत्रफल से प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति
= 200 वॉट का 20%
= 200 × 20100 = 40 वॉट
इसलिए 40 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है = 1 मी2 क्षेत्रफल से।
∴ 1 वॉट उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= 140 क्षेत्रफल से
∴ 8 kw उपभोगी शक्ति प्राप्त होती है
= 140 × 8 × 1000 क्षेत्रफल से।
= 200 मीटर2 क्षेत्रफल से।

(b) इस क्षेत्रफल की तुलना जटिल घर की छत से करने के लिए माना छत की भुजा a है।
∴ छत का क्षेत्रफल = a × a2
a2 = 200
a = 200‾‾‾‾√ = 14.14 मीटर
= 14 मीटर
अर्थात् आवश्यक क्षेत्रफल 14 मीटर × 14 मीटर आकार के भवन की छत के क्षेत्रफल के समतुल्य है।

Bihar Board Class 11 Physics कार्य, ऊर्जा और शक्ति Additional Important Questions and Answers

अतिरिक्त अभ्यास के प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न 6.24
0.012 kg द्रव्यमान की कोई गोली 70 ms-1 की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 kg द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरंत ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।
उत्तर:
दिया है:
गोली का द्रव्यमान, m = 0.012 किग्रा,
गोली की प्रा० चाल, u = 70 मीटर/सेकण्ड
गोली की अन्तिम चाल v = 0
लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान, m = 0.4 किग्रा
लकडी के गटके की प्रा० चाल, u1 = 0
माना कि संघट्ट के बाद गोली तथा गुटके की अन्तिम चाल v मीटर/सेकण्ड है।
संवेग संरक्षण के नियमानुसार,
संघट्ट से पूर्व गोली तथा गुटके का संवेग = संघट्ट के पश्चात् दोनों का अन्तिम संवेग।
∴ mu + mu1 = (m + m)v
∴ 0.012 × 70 + 0.4 × 0
= (0.012 + 0.4) y
∴ v = 0.012×700.412 = 2.04 मीटर/सेकण्ड
माना गुटका संघट्ट के बाद h ऊँचाई तक ऊपर उठता है।
∴ संघट्ट से पूर्व गुटके व गोली की KE में कमी = संघट्ट के बाद गुटके व गोली की P.E. में वृद्धि
∴ 12 (m + m) v2 = (m + m) gh
∴ h = 𝑣22𝑔 = 2.04×2.042×9.8
= 0.212 मीटर
= 21.2 सेमी
गोली धंसने से उत्पन्न हुई ऊष्मा
= 12 mu2 – 12 (m + m) v2
= 12 × 0.012 × 702 – 12 × 0.412 × 2.042
= 28.54 जूल

प्रश्न 6.25
दो घर्षण रहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिंदु पर मिलते हैं। बिंदु A से प्रत्येक पथ पर एक-एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि θ1 = 30°, θ2 = 60° और h = 10m दिया है, तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुँचने में लिए गए समय क्या हैं?
उत्तर:
AB तथा AC क्रमश: θ1, व θ2, पर झुके दो समतल तल हैं। दोनों पत्थर एक ही समय नीचे नहीं आएंगे।
व्याख्या: माना इन तलों पर इन पत्थरों के भार क्रमश: m1g

व m2g हैं। m1g तथा m2g के वियोजित घटक चित्र के अनुसार होंगे।
माना पहले व दूसरे पत्थर में उत्पन्न त्वरण क्रमशः a1 व a2 हैं। तब
या ma1 = m1g sin θ1
a1 = g sin θ1
इसी प्रकार, a2 = g sin θ2
∴ a2 = g sin θ2
∴ a2 > a1 i.e., a1 = sin 30° = 𝑔2
तथा a2 = g sin 60° = 𝑔3√2
v = u + at v = ar
या t = 𝑣𝑎 ………. (1)
यहाँ

अर्थात् दूसरा पत्थर कम समय लेगा व पहले पत्थर पर | जल्दी नीचे पहुँचेगा।

हाँ, दानों पत्थर एक साथ नीचे पहुँचेंगे।
व्याख्या: बिन्दु A पर तल की ऊँचाई, h = 10 मीटर है।
माना दोनों पत्थर, क्रमश: v1 व v2 वेग से नीचे पहुंचते हैं।
ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
चोटी पर स्थितिज ऊर्जा में क्षय = नीचे गतिज ऊर्जा में वृद्धि

प्रश्न 6.26
किसी रुक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 kg द्रव्यमान का गुटका किसी 100 Nm-1 स्प्रिंग नियतांक वाले स्प्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्प्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 cm नीचे खिसक जाता है। गुटके और आनत तल के मध्य घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कि स्प्रिंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है।
उत्तर:
दिया है:
गुटके का द्रव्यमान, m = 1 किग्रा
स्प्रिंग नियतांक, K = 100 न्यूटन/मीटर,
g = 10 मीटर/सेकण्ड2

माना गुटके को छोड़ने पर विस्थापन,
x = 10 सेमी = 0.1 मीटर
झुकाव, θ = 37°
∴ sin 37° = 0.6018 व cos 37° = 0.7996
माना नीचे की ओर x दूरी चलने में किया गया कार्य है।
∴ W = (mg sin θ – u mg cosθ)x …………. (1)
लेकिन स्प्रिंग में यह कार्य स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित रहेगा।
∴ PE = 12 Kx2 ……. (2)
समी० (1) व (2) से,
12 Kx2 = mg (sinθ – µcos θ).x
= µmg cosθ = – 12 kx = mg sinθ

= 0.125

प्रश्न 6.27
0.3 kg द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 ms-1 की एकसमान चाल से नीचे आ रही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लंबाई = 3 m) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्न होता?
उत्तर:
दिया है: बोल्ट का द्रव्यमान, m = -0.3 किग्रा
लिफ्ट की लम्बाई, h = 3 मीटर
छत पर बोल्ट की स्थितिज ऊर्जा, v = mgh
= 0.3 × 9.8 × 3
= 8.82 जूल
चूँकि बोल्ट लिफ्ट के फर्श से टकराकर बिल्कुल भी ऊपर नहीं उठता है, इसका तात्पर्य है कि फर्श से टकराने पर बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा, ऊष्मा में बदल जाती है। अत: बोल्ट के फर्श से टकराने पर उत्पन्न ऊष्मा 8.82 जूल है। लिफ्ट के स्थिर होने पर, यह एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र होता है। चूँकि गुरुत्वीय त्वरण का मान सभी स्थानों पर एक समान होता है अर्थात् हमारा उत्तर समान होगा।

प्रश्न 6.28
200 kg द्रव्यमान की कोई ट्रॉली किसी घर्षणरहित पथ पर 36 km h-1 की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 kg द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 m दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 ms-1 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अंतिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरंभ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?
उत्तर:
दिया है:
ट्रॉली का द्रव्यमान, m1 = 200 किग्रा, ट्रॉली की चाल u = 36 किमी प्रति घण्टा
= 36 × 518 = 10 मी/से
बच्चे का द्रव्यमान m2 = 20 किग्रा
बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल, v2 = 4 मीटर/सेकण्ड
माना ट्रॉली की अन्तिम चाल v1 है
∴ बच्चे के दौड़ना प्रारम्भ करने से पूर्व निकाय का संवेग,
Pi = (m1 + m2) u1
= (200 + 20) × 10 = 2200 किग्रा मीटर/सेकण्ड
बच्चे के ट्रॉली से कूदते समय निकाय का संवेग,
P1 = m1 v1 + m2 (v1 – v2)
= 200v1 + 20 (v1 – 4)
= 220v1 – 80
परन्तु संवेग संरक्षण के नियमानुसार, Pi = Pf
2200 = 220v1 – 80
या 220v1 = 2280
∴ v1 = 2280220 = 10.36 मीटर/सेकण्ड
ट्रॉली में 10 मीटर की दूरी चलने में बच्चे द्वारा लिया गया समय,

= 104 = 2.5 सेकण्ड
माना इस समय में ट्राली द्वारा चली गई दूरी x है।
∴ x = v × t = 10.36 × 2.5
= 25.9 मीटर।

प्रश्न 6.29
चित्र में दिए गए स्थितिज ऊर्जा वक्रों में से कौन-सा वक्र सम्भवतः दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँr गेंदों के केन्द्रों के मध्य की दूरी है और प्रत्येक गेंद का अर्धव्यास R है।
उत्तर:
जब गेंदें संघट्ट करेंगी और एक – दूसरे को संपीडित करेंगी तो उनके केन्द्रों के बीच की दूरी 7, 2R से घटती जाएगी और इनकी स्थितिज ऊर्जा बढ़ती जाएगी। प्रत्यानयन काल में गेंदें अपने आकार को वापस पाने की क्रिया में एक-दूसरे से दूर हटेंगी तो उनकी स्थितिज ऊर्जा घटेगी और प्रारम्भिक आकार पूर्णतः प्राप्त कर लेने पर (r = 2R) स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जाएगी।

केवल ग्राफ (V) की ही उपर्युक्त व्याख्या हो सकती है; अतः अन्य ग्राफों में से कोई भी बिलियर्ड गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट को प्रदर्शित नहीं करता है।

प्रश्न 6.30
विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए –
n → p + e
प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए, और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β – क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता (चित्र)।

[नोट: इस अभ्यास का हल उन कई तर्कों में से एक है जिन्हें डब्ल्यू पॉली द्वारा क्षय के क्षय उत्पादों में किसी तीसरे कण के अस्तित्व का पूर्वानुमान करने के लिए दिया गया था। यह कण न्यूट्रिनो के नाम से जाना जाता है। अब हम जानते हैं कि यह निजी प्रचक्रण 1/2 (जैसे e, p तथा n) का कोई कण है। लेकिन यह उदासीन है या द्रव्यमानरहित या (इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान की तुलना में) इसका द्रव्यमान अत्यधिक कम है और जो द्रव्य के साथ दुर्बलता से परस्पर क्रिया करता है। न्यूट्रॉन की उचित क्षय-प्रक्रिया इस प्रकार है:
n → p + e + v]
उत्तर:
माना न्यूट्रॉन के प्रोट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन में क्षय होने पर अवनमन (disintegration) द्रव्यमान ∆m है।
उत्सर्जित ऊर्जा, E = ∆mc2
परन्तु ∆m = न्यूट्रॉन का द्रव्यमान – (प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)

पाजिट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान परन्तु आवेश इलेक्ट्रॉन का विपरीत होता है। जब इलेक्ट्रॉन तथा पाजिट्रॉन एक दूसरे के समीप आते हैं तो वे एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं। इसके द्रव्यमान आइन्सटीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त ऊर्जा गामा किरणों के रूप में उत्सर्जित होती है जो कि निम्नवत् है –


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